कांगड़ा बैंक होटल ऋण मामला: जांच में उलझा सियासी कनेक्शन, हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
Kangra Bank Hotel Loan Case: Political Connections Embroiled
शिमला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के होटल ऋण मामले में सियासी कनेक्शन पर धुंध छंटती नजर नहीं आ रही है। जिन दो बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे, उनके बारे में अभी तक विजिलेंस कोई ठोस साक्ष्य नहीं जुटा पाई है। मुख्य आरोपित युद्धवीर सिंह बैंस की जमानत पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
अब इस निर्णय पर मामले की दिशा और आगे की जांच निर्भर मानी जा रही है। मामले से जुड़े बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज कर पूछताछ पूरी हो चुकी है।
विजिलेंस जांच में अब तक सामने आया है कि होटल निर्माण के नाम पर स्वीकृत ऋण में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने न केवल आंतरिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड के दिशा-निर्देश को भी नजरअंदाज किया। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ऋण की राशि वास्तव में प्रोजेक्ट पर खर्च हुई या उसे अन्यत्र डायवर्ट कर दिया गया।
आठ के विरुद्ध है मामला दर्ज
इस मामले में युद्धवीर बैंस की शिकायत पर पुलिस थाना सदर ऊना में बैंक के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर समेत आठ अधिकारियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की गई थी।
शिकायत में क्या आरोप
शिकायत में आरोप लगाया है कि ऋण की राशि समय पर जारी नहीं की गई, जिससे उनके करीब 240 करोड़ रुपये के होटल प्रोजेक्ट को काफी आर्थिक नुकसान हुआ। सबसे गंभीर सवाल बैंक रिकॉर्ड को लेकर उठे हैं। ऋण फाइल से महत्वपूर्ण दस्तावेजों में वैल्यूएशन और रिजर्व प्राइस से जुड़ी नोटिंग्स गायब हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि संपत्तियों का मूल्य जानबूझकर कम दिखाकर रिकवरी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
अब हाई कोर्ट के निर्णय पर नजर
विजिलेंस ने इस मामले से जुड़े सभी बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज कर पूछताछ कर ली है। विजिलेंस की नजर अब प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय पर है उसी के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
कोरे कागज में करवाए मेरे हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल किया : बैंस
युद्धवीर सिंह बैंस का कहना है कि जांच के नाम पर उनसे कोरे कागज में यह कहकर हस्ताक्षर करवाए गए कि आपके हस्ताक्षर नमूने की लिखावट के लिए फोरेंसिक लैब को भेजना है। अब बताया जा रहा है कि उस दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया गया। विजिलेंस उस दस्तावेज को सार्वजनिक करे ताकि जनता को सच्चाई का पता चले।